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वाल्मीकि रामायण 73.31

नाना विहग संकीर्णे रंस्यसे राम निर्वृतः ।
ऋष्यमूकः तु पंपायाः पुरस्तात् पुष्पित द्रुमः ॥३-७३-३१॥

पूरा अध्याय