ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 7373.30वाल्मीकि रामायण 73.30मातंग वनम् इति एव विश्रुतम् रघुनंदन । तस्मिन् नंदन संकाशे देव अरण्य उपमे वने ॥३-७३-३०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय