ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 7272.5वाल्मीकि रामायण 72.5ततः चिताया वेगेन भास्वरो विरज अंबरः । उत्पपात आशु संहृष्टः सर्व प्रत्यंग भूषणः ॥३-७२-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय