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वाल्मीकि रामायण 72.4

स विधूय चिताम् आशु विधूमो अग्निर् इव उत्थितः ।
अरजे वाससी बिभ्रत् मालाम् दिव्याम् महाबलः ॥३-७२-४॥

पूरा अध्याय