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वाल्मीकि रामायण 67.10

ददर्श पतितम् भूमौ क्षतज आर्द्रम् जटायुषम् ।
तम् दृष्ट्वा गिरि शृंग आभम् रामो लक्ष्मणम् अब्रवीत् ॥३-६७-१०॥

पूरा अध्याय