ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6262.5वाल्मीकि रामायण 62.5कर्णिकार वनम् भद्रे हसंती देवि सेवसे । अलम् ते परिहासेन मम बाधावहेन वै ॥३-६२-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय