ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6262.4वाल्मीकि रामायण 62.4कदली काण्ड सदृशौ कदल्या संवृता उभौ । ऊरू पश्यामि ते देवि न असि शक्ता निगूहितुम् ॥३-६२-४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय