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वाल्मीकि रामायण 62.13

कुशलम् परिपृच्छन्तम् कथम् शक्षे निरीक्षितुम् ।
विदेह रजो नूनम् माम् दृष्ट्वा विरहितम् तया ॥३-६२-१३॥

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