ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6262.12वाल्मीकि रामायण 62.12कातरत्वम् प्रकाशम् हि सीता अपनयनेन मे । निवृत्त वन वासः च जनकम् मिथिल अधिपम् ॥३-६२-१२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय