ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6161.9वाल्मीकि रामायण 61.9धिक् त्वाम् इति परे लोके व्यक्तम् वक्ष्यति मे पिता । विवशम् शोक संतप्तम् दीनम् भग्न मनोरथम् ॥३-६१-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय