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वाल्मीकि रामायण 61.7

पर लोके महाराजो नूनम् द्रक्ष्यति मे पिता ।
कथम् प्रतिज्ञाम् संश्रुत्य मया त्वम् अभियोजितः ॥३-६१-७॥

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