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वाल्मीकि रामायण 58.9

यदि जीवति वैदेही गमिष्याम्य् आश्रमम् पुनः ।
सुवृत्ता यदि वृत्ता सा प्राणान् त्यक्ष्यामि लक्ष्मण ॥३-५८-९॥

पूरा अध्याय