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वाल्मीकि रामायण 58.4

याम् विना न उत्सहे वीर मुहूर्तम् अपि जीवितुम् ।
क्व सा प्राण सहाया मे सीता सुर सुत उपमा ॥३-५८-४॥

पूरा अध्याय