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वाल्मीकि रामायण 58.11

ब्रूहि लक्ष्मण वैदेही यदि जीवति वा न वा ।
त्वयि प्रमत्ते रक्षोभिः भक्षिता वा तपस्विनी ॥३-५८-११॥

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