Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 55.30

विमानम् सूर्य संकाशम् तरसा निर्जितम् रणे ।
विशालम् रमणीयम् च तत् विमानम् मनो जवम् ॥३-५५-३०॥

पूरा अध्याय