ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5454.13वाल्मीकि रामायण 54.13संरूढ कक्ष्या बहुलम् स्वम् अंतः पुरम् आविशत् । तत्र ताम् असित अपांगाम् शोक मोह परायणाम् ॥३-५४-१३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय