ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5353.20वाल्मीकि रामायण 53.20खड्ग पत्र वनम् चैव भीमम् पश्यसि रावण । तप्त कांचन पुष्पाम् च वैदूर्य प्रवर च्छदाम् ॥३-५३-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय