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वाल्मीकि रामायण 53.2

रोष रोदन ताम्राक्षी भीमाक्षम् राक्षस अधिपम् ।
रुदती करुणम् सीता ह्रियमाणा इदम् अब्रवीत् ॥३-५३-२॥

पूरा अध्याय