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वाल्मीकि रामायण 52.9

प्रधर्षितायाम् वैदेह्याम् बभूव स चरा अचरम् ।
जगत् सर्वम् अमर्यादम् तमसा अन्धेन संवृतम् ॥३-५२-९॥

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