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वाल्मीकि रामायण 52.44

ततः तु सा चारु दती शुचि स्मिताविना कृता बन्धु जनेन मैथिली ।
अपश्यती राघव लक्ष्मणाउ उभौविवर्ण वक्त्रा भय भार पीडिता ॥३-५२-४४॥

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