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वाल्मीकि रामायण 52.43

अवेक्षमाणाम् बहुशो वैदेहीम् धरणी तलम् ।
स ताम् आकुल केशान्ताम् विप्रमृष्ट विशेषकाम् ।जहार आत्म विनाशाय दशग्रीवो मनस्विनाम् ॥३-५२-४३॥

पूरा अध्याय