ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5252.34वाल्मीकि रामायण 52.34उत्पात वात अभिहता नाना द्विज गण आयुताः । मा भैः इति विधूत अग्रा व्याजह्रुः इव पादपाः ॥३-५२-३४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय