ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5252.24वाल्मीकि रामायण 52.24सा पद्म पीता हेम आभा रावणम् जनक आत्मजा । विद्युत् घनम् इव आविश्य शुशुभे तप्त भूषणा ॥३-५२-२४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय