ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5252.19वाल्मीकि रामायण 52.19बभूव जलदम् नीलम् भित्त्वा चन्द्र इव उदितः । सु ललाटम् सु केश अंतम् पद्म गर्भ आभम् अव्रणम् ॥३-५२-१९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय