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वाल्मीकि रामायण 52.18

तस्याः तत् विमलम् - सु नसम् - वक्त्रम् आकाशे रावण अंक गम् ।
न रराज विना रामम् विनालम् इव पंकजम् ॥३-५२-१८॥

पूरा अध्याय