ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4949.7वाल्मीकि रामायण 49.7संरक्त नयनः श्रीमान् तप्त कांचन भूषणः । क्रोधेन महता आविष्टो नील जीमूत सन्निभः ॥३-४९-७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय