ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4949.24वाल्मीकि रामायण 49.24हा लक्ष्मण महाबाहो गुरु चित्त प्रसादक । ह्रियमाणाम् न जानीषे रक्षसा काम रूपिणा ॥३-४९-२४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय