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वाल्मीकि रामायण 49.23

ततः सा राक्षसेन्द्रेण ह्रियमाणा विहायसा ।
भृशम् चुक्रोश मत्ता इव भ्रांत चित्ता यथा आतुरा ॥३-४९-२३॥

पूरा अध्याय