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वाल्मीकि रामायण 49.13

त्यज्यताम् मानुषो भावो मयि भावः प्रणीयताम् ।
राज्यात् च्युतम् असिद्ध अर्थम् रामम् परिमित आयुषम् ॥३-४९-१३॥

पूरा अध्याय