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वाल्मीकि रामायण 48.20

एवम् उक्ता तु वैदेही क्रुद्धा संरक्त लोचना ।
अब्रवीत् परुषम् वाक्यम् रहिते राक्षस अधिपम् ॥३-४८-२०॥

पूरा अध्याय