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वाल्मीकि रामायण 48.11

प्राकारेण परिक्षिप्ता पाण्डुरेण विराजिता ।
हेम कक्ष्या पुरी रम्या वैदूर्यमय तोरणा ॥३-४८-११॥

पूरा अध्याय