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वाल्मीकि रामायण 47.45

यद् अंतरम् सिंह शृगालयोः वनेयद् अंतरम् स्यन्दनिका समुद्रयोः ।
सुर अग्र्य सौवीरकयोः यद् अंतरम्तद् अंतरम् दाशरथेः तव एव च ॥३-४७-४५॥

पूरा अध्याय