Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 47.41

अक्षि सूच्या प्रमृजसि जिह्वया लेढि च क्षुरम् ।
राघवस्य प्रियाम् भार्याम् अधिगंतुम् त्वम् इच्छसि ॥३-४७-४१॥

पूरा अध्याय