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वाल्मीकि रामायण 47.40

मंदरम् पर्वत श्रेष्ठम् पाणिना हर्तुम् इच्छसि ।
काल कूटम् विषम् पीत्वा स्वस्तिमान् गंतुम् इच्छसि ॥३-४७-४०॥

पूरा अध्याय