Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 45.19

खरस्य निधने देवि जनस्थान वधम् प्रति ।
राक्षसा विविधा वाचो व्यवहरन्ति महावने ॥३-४५-१९॥

पूरा अध्याय