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वाल्मीकि रामायण 44.22

रामो रुधिर सिक्त अंगम् चेष्टमानम् महीतले ।
जगाम मनसा सीताम् लक्ष्मणस्य वचः स्मरन् ॥३-४४-२२॥

पूरा अध्याय