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वाल्मीकि रामायण 44.21

चक्रे स सुमहा कायम् मारीचो जीवितम् त्यजन् ।
तम् दृष्ट्वा पतितम् भूमौ राक्षसम् भीम दर्शनम् ॥३-४४-२१॥

पूरा अध्याय