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वाल्मीकि रामायण 42.33

मुक्ता मणि विचित्र अंगम् ददर्श परम अंगना ।
तम् वै रुचिर दंत ओष्ठम् रूप्य धातु तनू रुहम् ॥३-४२-३३॥

पूरा अध्याय