ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3232.7वाल्मीकि रामायण 32.7देव असुर विमर्देषु वज्र अशनि कृत व्रणम् । ऐरावत विषाण अग्रैः उत्कृष्ट किण वक्षसम् ॥३-३२-७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय