ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3232.5वाल्मीकि रामायण 32.5आसीनम् सूर्य संकाशे कांचने परमासने । रुक्म वेदि गतम् प्राज्यम् ज्वलंतम् इव पावकम् ॥३-३२-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय