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वाल्मीकि रामायण 30.28

स वृत्र इव वज्रेण फेनेन नमुचिर् यथाअ ।
बलो वा इन्द्र अशनि हतो निपपात हतः खरः ॥३-३०-२८॥

पूरा अध्याय