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वाल्मीकि रामायण 30.27

स पपात खरो भूमौ दह्यमानः शर अग्निना ।
रुद्रेण एव विनिर्दग्धः श्वेत अरण्ये यथा अन्धकः ॥३-३०-२७॥

पूरा अध्याय