ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3030.24वाल्मीकि रामायण 30.24ततः पावक संकाशम् वधाय समरे शरम् । खरस्य रामो जग्राह ब्रह्म दण्डम् इव अपरम् ॥३-३०-२४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय