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वाल्मीकि रामायण 30.23

तम् आपतंतम् संरब्धम् कृत अस्त्रो रुधिर आप्लुतम् ।
अपसर्पत् द्वि त्रि पदम् किंचित् त्वरित विक्रमः ॥३-३०-२३॥

पूरा अध्याय