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वाल्मीकि रामायण 29.21

न तु माम् इह तिष्ठंतम् पश्यसि त्वम् गदा धरम् ।
धराधरम् इव अकंप्यम् पर्वतम् धातुभिः चितम् ॥३-२९-२१॥

पूरा अध्याय