ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 1515.22वाल्मीकि रामायण 15.22शमी शाखाभिः आस्तीर्य धृढ पाशावपाशितम् । कुश काश शरैः पर्णैः सुपरिच्छादिताम् तथा ॥३-१५-२२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय