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वाल्मीकि रामायण 11.81

निगृह्य तरसा मृत्युम् लोकानाम् हित काम्यया ।
दक्षिणा दिक् कृता येन शरण्या पुण्य कर्मणा ॥३-११-८१॥

पूरा अध्याय