ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 1111.80वाल्मीकि रामायण 11.80प्राज्य धूम आकुल वनः चीर माला परिष्कृतः । प्रशान्त मृग यूथः च नाना शकुनि नादितः ॥३-११-८०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय