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वाल्मीकि रामायण 96.9

राजा वा राजमात्रो वा मृगयामटते वने ।
अन्यद्वा श्वापदं किञ्चित् सौमित्रे ज्ञातुमर्हसि ॥ २.९६.९॥

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