Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 96.20

गृहीतधनुषौ चावां गिरिं वीरश्रयावहै ।
अथवेहैव तिष्ठावः सन्नद्धावुद्यतायुधौ ॥ २.९६.२०॥

पूरा अध्याय